पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार रामनाथ बेख़बर की एक ग़ज़ल:
ख़ारो - गुल मिले कुछ भी यार कोलकाता में,
हम लुटायेंगे हरसू
प्यार कोलकाता में।
हम नहीं हैं बाहर के कौन तुमको समझाये,
दिल से दिल का जुड़ता है तार कोलकाता में।
शहरे कोलकाता की बात क्या निराली है,
कितनी अम्नो मिल्लत है यार कोलकाता में।
हाथ वाले रिक्शे हैं ट्राम और मेट्रो भी,
हर कदम पे मिलती है कार कोलकाता में।
शानोशौक मत पूछो, कैसे - कैसे दीवाने,
कोई किंग है
कोई जार कोलकाता में।
बेख़बर की धड़कन में सपनों की ये नगरी है,
हर किसी को मिलता है प्यार कोलकाता में।
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