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कविता: कब तक बलात्कार होते रहेंगे (रीता जयहिन्द, दिल्ली)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार रीता जयहिन्द  की एक कविता  जिसका शीर्षक है “कब तक बलात्कार होते रहेंगे”:

कब तक बेटियों के साथ बलात्कार होते रहेंगे?
कब तक ज़माने वालों आँख मींचकर सोते रहेंगे?
आज उसकी बिटिया के साथ में बलात्कार हुआ है।
कल तेरी बेटी सयानी होगी, सोया क्यों हुआ है?
शस्त्र उठा आज बदला लो बिटिया की अस्मत का।
बेटी ईश्वर की देन हैं खाती अपनी किस्मत का।।
बेटियों पर जब भी अन्याय हो तुम आवाज उठाओ।
ज़माने वालों जागो आज मिलकर एक हो जाओ।।
बलात्कारी का हश्र होना चाहिए सिर्फ फाँसी।
बेटियों को तलवार थामकर बनाओ रानी झाँसी।।
देखना एक दिन जीत होगी  बेटियों के न्याय की।
सत्य जीतेगा हार तो निश्चित होगी अन्याय की।।
अन्याय सहन करना भी एक बहुत बड़ा अपराध है।
जो जन अन्याय सहेगा उसका जीवन अभिशाप है।।
तो देर किस बात की? अपराधी को गिन - गिनकर मारो।
यही शाश्वत सत्य है तुम अपना जीवन संवारो।।
बलात्कारी, पापी, देशद्रोही देखो बचने न पाए।
ऐसे अपराधी अपनी मौत को असमय ही बुलाए।।
मौत भी आज सिहर जाए ऐसी सजा इनको देना ।
भारत माता की संतान हो तो फर्ज निभा लेना।।

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