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कविता: संघर्ष – ए – जीवन (प्रिया सिंह, कार्बीआंगलांग, असम)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार प्रिया सिंह की एक कविता  जिसका शीर्षक है “संघर्ष जीवन”:         
किस किस से लडूं मैं,
अपनों से या परायों से।
जीवन में संघर्ष बहुत है,
ख़ुद के लिए इस दुनिया से।
 
उन तूफानों से क्या डरना,
जो बचाये दकियानूसी विचारों से।
अनगिने ठोकर खाना पड़ता है,
सीढ़ियां दर - कदर चढ़ने से।
 
बुझ जाते हैं सुमन मन के
निराशाओं के दीप जलाने से।
संघर्ष ही ज़िन्दगी की कहानी बनेगा
बस पसीने के स्याही और हिम्मत की कलम से।
 
जीवन एक संकीर्ण संघर्षमय है पथ,
बन अर्जुन कर्म करने की अस्त्र - शस्त्र से।
पराजय से अब हार नहीं सकते,
मृत्युलोक हो चाहे महाभारत की कुरुक्षेत्र से।
 
अभी का छोड़ो और आगे की देखो,
लक्ष्य भी हासिल होता बस संघर्षों की पूंजी से।
ज़िंदगी ने संघर्ष से मिलाया,
संघर्ष ने जीवन की हकीकत से।

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