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कविता: सैनिक, फौज़ी, जवान (डॉ● शरद नारायण खरे, मंडला, मध्य प्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉशरद नारायण खरे की एक कविता  जिसका शीर्षक है “सैनिक, फौज़ी, जवान”:

ऐे सैनिक, फौज़ी, जवान, है तेरा नितअभिनंदन।
अमन - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
गर्मी, जाड़े, बारिश में भी, तू सच्चा सेनानी
अपनी माटी की रक्षा को, तेरी अमर जवानी
तेरी देशभक्ति लखकर के, माथे तेरे चंदन।
अमन - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
आँधी - तूफाँ खाते हैं भय, हरदम माथ झुकाते
रिपु तो तुझको देख सिहरता, घुसपैठी थर्राते
सीमाओं के प्रहरी तू तो, वीर शिवा का नंदन।
अमन - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
तू सीमा पर डँटा हुआ पर, हम त्यौहार मनाते
तू जगता, मौसम से लड़ता, हम नींदों में जाते
तेरे कारण खुशहाली है, किंचित भी ना क्रंदन ।
अमन - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
मात - पिता, बहना - भाई सब, तेरे भी हैं नाते
तू पति है,तो पुत्र भी चोखा, तुझको सभी सुहाते
पर अपने इस मुल्क़ की ख़ातिर, छोड़े तू सब बंधन।
अमन  - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
तुझसा कोई और न दूजा, त्याग तिरा यशगानी
केवल इस माटी के नामे, तूने की ज़िंदगानी
बोले नित जयहिंद का नारा, तेरा पावन तन - मन।
अमन-चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।
 
लोकतंत्र है तुझसे रक्षित, सेवा में तू हर पल
लिये समर्पण, त्याग औ' निष्ठा, तू गंगा की कल - कल
परमवीर तू, महाबली भी, गाता है जन गण - मन ।
अमन - चैन का तू पैगम्बर, तेरा है अभिवंदन।।

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