पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार पूजा भूषण झा की एक कविता जिसका
शीर्षक है “माँ”:
माँ तेरे वर्णन मे हर शब्द
कम पर जाएँगे ,
तेरी दूध की कीमत
माँ किस
तरह हम चुकाएंगे,
रात मे जागकर
मेरी देख-रेख
तु करती थी,
बेटी पे कोई उंगली न उठाए
मेरे लिए तु लड़ती थी,
मेरे लिए न जाने
कितने ताने
माँ तु सहती थी,
फिर भी प्यार मे
कमी नही था
साथ हमेशा रहती थी,
उन प्यारो को उन
साथो को
भूल कभी न पाएँगे,
माँ तेरे वर्णन
मे हर शब्द
कम पर जाएंगे!
तेरी ही मै खुन
हुँ माँ ,तेरा ही
अक्स झलकता है,
हर पिड़ा को सह
लेती हूँ
जब भी ठोकर लगता है!
तु माँ मेरी हिम्मत भी है
तु ही मेरी ताकत है,
गलत कदम कभी उठ
ना
पाएं,तुने ये समझाया है,
तुझे कभी कोई
दर्द न हो
हम वैसा राह बनाएंगे,
माँ तेरे वर्णन
मे हर शब्द
कम पर जाएंगे!
बचपन से लेकर आज
तक हर
कष्ट तेरा मुझे याद है,
फिर भी सबको अपना
समझी
हर वो पल मुझे याद है,
तेरा वो खोया पल
शायद न
लौटा पाएंगे,
माँ तेरी वर्णन
मे हर शब्द कम पर जाएंगे!
हर संभव कोशिश मै करूँगी
आच तेरे आंचल पे न हो,
मेरे लिए सिर झुके न तेरी
काम एैसा कर जाएंगे
माँ तेरे वर्णन मे हर शब्द
कम पर जाएंगे!!
माँ तेरे वर्णन मे हर शब्द
कम पर जाएँगे ,
तरह हम चुकाएंगे,
तु करती थी,
मेरे लिए तु लड़ती थी,
माँ तु सहती थी,
साथ हमेशा रहती थी,
भूल कभी न पाएँगे,
कम पर जाएंगे!
अक्स झलकता है,
जब भी ठोकर लगता है!
तु माँ मेरी हिम्मत भी है
तु ही मेरी ताकत है,
पाएं,तुने ये समझाया है,
हम वैसा राह बनाएंगे,
कम पर जाएंगे!
कष्ट तेरा मुझे याद है,
हर वो पल मुझे याद है,
लौटा पाएंगे,
आच तेरे आंचल पे न हो,
काम एैसा कर जाएंगे
माँ तेरे वर्णन मे हर शब्द
कम पर जाएंगे!!


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