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कविता: अब प्राथमिकता तय कर तू ! (अर्चना राय "खुराफ़ाती", मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार अर्चना राय "खुराफ़ाती" की एक कविता  जिसका शीर्षक है “अब प्राथमिकता तय कर तू !”:

एक बात बताओ!
बेतरतीब से फैले इन जुल्फों के पीछे
तुमने जो चेहरा छुपा रखा है,
उस पर चोट के काले निशान क्यों हैं ?
 
कल की सुरमई अंखियों के नीचे
आज स्याह से जो गड्ढे पड़े हैं,
उनमें दबे - कुचले तेरे अरमान क्यों हैं ?
 
चलो माना कि,
तेरी किस्मत की लकीरों में
वो "नशेड़ी" ही बदा था।
पर शुरू में मौन सहमति से
उसकी लत को बढ़ावा तुमने दिया,
तो अब इतनी परेशान क्यों है ?
 
सहनशीलता की चरम सीमा
को पार कर चुप्पी ही
तेरी समस्या का समाधान क्यों है ?
 
चल उठ !
अब प्राथमिकता तय कर तू ।
जंग - ए - जिंदगी में कूदने से पहले
अपनी प्राथमिकता अब तय कर तू
अस्तित्व की लड़ाई खुद लड़ तू
समाज के तानों से मत डर तू।
 
वरना मत पूछ,
 बदकिस्मती तुझपे ही मेहरबान क्यों है ?
जिंदगी लेती तेरे ही इम्तिहान क्यों है ?
तो चल उठ ,
अब प्राथमिकता तय कर तू ।
अस्तित्व की नई परिभाषा गढ़ तू ।

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