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कविता: खुशी (गरिमा मिश्रा, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार गरिमा मिश्रा  की एक कविता  जिसका शीर्षक है “खुशी”:
 
ख़ुशी एक साज है,
दुनिया के हर एक को उसकी आस है।
गम का आना खुशी के साथ,
तभी तो समझ आता है खुशी का राग।
न जाने कितने रूपो में आती है खुशी,
पर आखिर में होती है ये दिल की खुशी का ही परिणाम।
दिल में जीने की नई उमंग जगाती है,
दिल की खुशी की पहचान हो ती है मुस्कान।
खिली मुस्कान ही,
हर तकलीफ की दवा है।
खुशी के दीपक में,
मुस्कान तेल के समान है।
हर किसी को खुशी की चाह है
खुशी हर गम की दवा है
खुशी उसको ही रास आती है
जिसने गम का अंधेरा सहा है,
खुशी और गम से ही सजती है दुनिया
जहाँ गम अनुभव बनकर रह जाता है
वही मीठी खुशी का एहसास मिलता है।
खुशी एक साज है,
हर एक को उसकी आस है।

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