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कविता: बहेलिया (डॉ• सी• पी• श्रीवास्तव "आदित्य अभिनव", भरवारी, कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
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कभी - कभी
पंख कतर देने के बाद भी
पक्षी थोड़ी ऊँचाई तक
उड़ते हैं ----
उड़ने  के हौसले से
कुछ दूर आकाश में
विचरण कर ही लेते हैं ----
 
इसीलिए
आजकल बहेलिया ने
नया तरीका ईजाद किया है
पंख नहीं काटते
पिंजरा भी बंद नहीं करते
चारो तरफ पहरा भी नहीं डालते
बस
चारा में कुछ ऐसा
मनभावक - मनमोहक - मादक तत्व
मिला देते हैं कि
केसर सुरभित महक से ही
उनका मन भर जाता है
और
वे पंख उठा - उठा कर
पिंजरे में चारों तरफ घूमते हैं
बहेलिया के इशारे पर
धरती पर चोंच पटक-पटक कर
भारत माता की जय बोलते हैं ----

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