पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉ• सी• पी• श्रीवास्तव
"आदित्य अभिनव" की एक कविता जिसका
शीर्षक है “बहेलिया”:
कभी - कभी
पंख कतर देने के बाद भी
पक्षी थोड़ी ऊँचाई तक
उड़ते हैं ----
उड़ने के हौसले से
कुछ दूर आकाश में
विचरण कर ही लेते हैं ----
आजकल बहेलिया ने
नया तरीका ईजाद किया है
पंख नहीं काटते
पिंजरा भी बंद नहीं करते
चारो तरफ पहरा भी नहीं डालते
बस
चारा में कुछ ऐसा
मनभावक - मनमोहक - मादक तत्व
मिला देते हैं कि
केसर सुरभित महक से ही
उनका मन भर जाता है
और
वे पंख उठा - उठा कर
पिंजरे में चारों तरफ घूमते हैं
बहेलिया के इशारे पर
धरती पर चोंच पटक-पटक कर
भारत माता की जय बोलते हैं ----


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