पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार अर्चना राय "खुराफ़ाती" की एक कविता जिसका शीर्षक है “एक सयाना चूहा”:
एक सयाना चूहा
धीरे - धीरे
कुतरता रहता है
तुम्हारे ख्वाबों
को, तुम्हारी मंजिलों को
जातिवाद और
साम्प्रदायिकता की आड़ में
और तुम लगाते हो
उसको लडुअन का भोग
उसे गजानन का
वाहन समझकर ।
एक सयाना चूहा
धीरे धीरे कुतरता
रहता है
तुम्हारी सांस को, अटूट विश्वास को
आवास, नौकरी और स्वर्णिम भविष्य के नाम पर
और तुम कर बैठते
हो
अपना सर्वस्व
समर्पण
उसे गजानन का
वाहन समझकर ।
एक सयाना चूहा
धीरे - धीरे हनन
करता रहता है
तुम्हारे विचारों
का , तुम्हारे अधिकारों का
मंदिर, मस्जिद और पुल निर्माण के नाम पर
और तुम कर बैठते
हो
उस पर वोटों की
वर्षा
उसे गजानन का
वाहन समझकर ।
उस बहुरूपिए चूहे
की
जालसाजी सामने
आने पर तुम
बड़े आक्रोश से
रैलियां निकालते हो
उसको निकाल बाहर
करने को
उसका सफाया करने
को,
पर वह चालाक चूहा
तुम्हारी नाक के
नीचे से गुजरकर
दुबक जाता है
अपने बिल में
और दूसरे रास्ते
से पहुंच जाता है
फिर से गजानन के
पैरों के पास
किसी और पार्टी
की तरफ से ।
और तुम बिठा लेते
हो उसे
फिर से सर आंखों
पर ।


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