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कविता: आत्मनिर्भर भारत : एक सवाल (विवेक सिन्हा, सबैजोर, जमुई, बिहार)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार विवेक सिन्हा की एक कविता  जिसका शीर्षक है “आत्मनिर्भर भारत : एक सवाल”:
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
गाँधी, पटेल, अटल और कलाम की लिखी कहानी है?
या मोदी, शाह और सीतारमण की जुबानी है?
गरीबों की गरीबी पर किया गया प्रहार है? या,
वास्तव में अपनी नीतियों से ही मिली हार है ?
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
'मेक इन इंडिया' द्वारा विदेशी कम्पनियों को बुलाना आत्मनिर्भरता है? या,
लोकल के लिए वोकल का मंत्र देना आत्मनिर्भरता है?
भारतीय मूल के नाम पर विदेशियों को सम्मानित करना आत्मनिर्भरता है? या,
अपने देश के टैलेंट को यहाँ जगह न दे पाना आत्मनिर्भरता है?
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
मृत बच्चे को गोद लिये रोते बाप की पुकार है? या,
खुले आसमान में सोते लोगों की हार है?
हजारों किलोमीटर भूखा चलता हुआ जन समूह है? या,
व्यवस्था में कुचली गयी बेबस रूह है?
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
बलात्कार से सहमी लड़कियों की चीख़ है? या,
मंदिर, मस्ज़िद, गुरूद्वारे में बँट रही भीख़ है?
पुलवामा और उरी में शहीद होता जवान है? या,
एनआरसीऔर सीपर लड़ता हिन्दू - मुस्लमान है?
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
भाषणों से खुश हो तालियां बजाने वालों की मासूमियत है?या,
मीडिया द्वारा बेची गई झूठे सपनों की हक़ीक़त है?
ट्रेन की पटरियों के बीच रौंदे गये इंसानों की लाश है? या,
पैदल घर पहुँचने से पहले मासूम की उखड़ गयी साँस है?
 
आत्मनिर्भरता क्या है?
ट्रेन में मूँगफली फेंककर जापान की सफ़ाई पर चर्चा करना आत्मनिर्भरता है? या,
सब कुछ देखकर आँखें बंद कर केवल बुराई करना आत्मनिर्भरता है?
अपने परिवार का पेट पाल लेना आत्मनिर्भरता है? या,
सोफे पर बैठकर घंटो विचार करना आत्मनिर्भरता है?

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