पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार रूणा रश्मि "दीप्त" की एक कविता जिसका
शीर्षक है “दिवाली”:
है ये त्यौहार दिवाली, सजाओ दीप सब मिलकर।
अमावश रात है काली, करो रौशन जगत मिलकर।
घड़ी सौहार्द्र की
है ये, रखो ना द्वेश तुम मन में।
खुशी बाँटें सभी मिलकर, रहे ना क्लेश जीवन में।
दिवस पावन बहुत
है ये, करो सब स्वच्छ घर आँगन।
उसी तरह सभी सुन लो, रखो ये स्वच्छ अंतर्मन।
पधारी मातु
लक्ष्मी हैं, लिए हाथों में समृद्धि।
गणपति जी पधारे हैं, संग अपने लिए सिद्धि।
खुशी का पर्व आया
है, मनाओ जोश में सारे।
मगर भूलो नहीं उनको, जो हैं लाचार बेचारे।
लगे संभव तुम्हें
यदि तो, जरा संज्ञान अब कर लो।
रहे घर में न अँधियारा, रौशनी तुम वहाँ भर दो।
है ये त्यौहार दिवाली, सजाओ दीप सब मिलकर।
अमावश रात है काली, करो रौशन जगत मिलकर।
खुशी बाँटें सभी मिलकर, रहे ना क्लेश जीवन में।
उसी तरह सभी सुन लो, रखो ये स्वच्छ अंतर्मन।
गणपति जी पधारे हैं, संग अपने लिए सिद्धि।
मगर भूलो नहीं उनको, जो हैं लाचार बेचारे।
रहे घर में न अँधियारा, रौशनी तुम वहाँ भर दो।


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