पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद
पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली
सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत
है। आज आपके सामने प्रस्तुत है
रचनाकार प्रियंका प्रियदर्शिनी की एक कविता जिसका
शीर्षक है “टीस”:
तुम्हारा दिया
दर्द
टीस बन गया
बेवजह आँखों का पानी बहकर
सूख गया
सुकून तुझे मिले
दिल ये दुआ करता
बेइंतिहा इश्क का
ये क्या हाल हुआ
वो किसी और की पहलू में
दिन रात रहे
हमारी फ्रिक को अब
नज़र अंदाज करें
कुसूर बता देता वो
संभाल कर विदा लेता जो
तड़पने की सज़ा दे
कैसे रह लेता वो
भूलती नही वो लम्हें
नज़रों में बिठा कर रखना
धड़कती सांसे नही जानती
अब भी नाम उसका भूलना
टीस बन गया
बेवजह आँखों का पानी बहकर
सूख गया
सुकून तुझे मिले
दिल ये दुआ करता
बेइंतिहा इश्क का
ये क्या हाल हुआ
वो किसी और की पहलू में
दिन रात रहे
हमारी फ्रिक को अब
नज़र अंदाज करें
कुसूर बता देता वो
संभाल कर विदा लेता जो
तड़पने की सज़ा दे
कैसे रह लेता वो
भूलती नही वो लम्हें
नज़रों में बिठा कर रखना
धड़कती सांसे नही जानती
अब भी नाम उसका भूलना


0 Comments