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कविता: कवि की कविता (श्वेता कुमारी, धनबाद, झारखंड)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार श्वेता कुमारी की एक कविता  जिसका शीर्षक है “कवि की कविता”:

यूँ अचानक ज़हन में छा जाती है,

जीना दूश्वार कर जाती है,

हृदय को बेतहाशा तड़पाती है,

हर तरफ वो - ही - वो नज़र आती है,

कभी दृश्य बनकर,कभी श्रव्य बनकर,

हर विषय पर सामने उभरकर आती है,

शब्दों की माला बनकर पन्नों पर बिखर जाती है,

कभी उसकी शक्ति है तो कभी उसकी भक्ति है,

ये हिंदी - साहित्य के जगत में सर्वत्र नजर आती है,

वेशभूषा नगण्य है इसकी,

यह लोकमानस के पटल पर अंकित हो जाती है,

राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारा, प्रेम का प्रतीक बनकर हृदय में समा जाती है,

तभी तो ये कवि की कविता कहलाती है।

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