पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉ• राजेन्द्र मिलन की एक “अज़ल”:
ग़ज़ल-अज़ल का द्वंद्व नहीं है,समयोचित है ये समीकरण ।
इसका जन्म
मान्यताओं का, करता आया
है नवींकरण ।
कुछ नया नहीं बस
है उरूज़,और छंदशास्त्र का गठबंधन,
है कोई नया
नहीं प्रचलन, सदियों में होता वशीकरण ।
होते हैं सदा
प्रयोग नये, जैसे गायन- वादन -नर्तन ,
पतझड़ के बाद चमन
खिलता, स्वाभाविक है ध्रुवीकरण।
रूढ़ीवादी रुग्णता
तथापि , मानवता
का कर रही क्षरण ,
राहों पर चलना
लीक छोड़, अन्वेषी
मन का तुष्टीकरण ।
मन दूषित विष
उगले वाणी, कैसे
पुष्पित राष्ट्रीयकरण ,
जो " मिलन " संस्कृति ना समझें, हो कैसे भूमंडलीकरण ।


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