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कविता: अपील एक वीर सैनिक की (अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी', कानपुर नगर, उत्तरप्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार अन्जनी अग्रवाल 'ओजस्वी' की एक कविता  जिसका शीर्षक है “अपील एक वीर सैनिक की”:


गूंज रहा चहु ओर यही नारा है,

ललकार मृत्यु ने आज पुकारा है।

ललकार सीमा पर रक्षा की है,

कफ़न सिर पर बाधें आये हैं हम।

राष्ट्र के अलख प्रहरी  हैं  हम,

न रखने देंगें दुश्मन को एक कदम।

गूंज रहा चहु ओर यही नैरा है,

ललकार मृत्यु ने आज पुकारा है।

जीवन मे संघर्ष नही हैं हमारे कम

कर्तव्य निभाकर ही अब लेंगे दम।

अमन चैन की प्रीत तो सजा दूँ,

मानवता को वह हक तो दिल दूँ।

उज्ज्वल भारत की अलख जगा दूँ,

सोते हुये प्रहरी को तो जगा दूँ।

गूंज रहा चहु ओर यही नारा हैं,

ललकार मृत्यु ने आज पुकारा है।

मैं बीज वृक्ष का एक  दर्पण हूँ ,

हर बार जनमता मरता रहता हूँ।

बिरासते बारीकियों की बिछा दूँ,

दिव्य पुंज की ज्योति तो जगा दूँ।

कर्मयोगी सा गीता पाठ तो कर लूँ,

थोड़ा अपना कर्तव्य तो निभा दूँ।

गूंज रहा चहु ओर यही नारा हैं,

ललकार मृत्यु ने आज पुकारा हैं।

ललकार मृत्यु ने आज पुकारा है।।

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