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कविता: डिप्लोमेट ........... (डॉ• अर्चना खण्डेलवाल, भीलवाड़ा, राजस्थान)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉअर्चना खण्डेलवाल की एक कविता  जिसका शीर्षक है “डिप्लोमेट ...........”:
               
औरतें ''डिप्लोमेट'' होती हैं
बताती कम छुपाती ज्यादा हैं
औरतें "डिप्लोमेट" होती हैं
दिल में दर्द होता है
चेहरे पर सुकून दिखाती हैं
औरतें ...
आँखों में नमी होती है
होठों पर मुस्कुराहट दिखाती है
औरतें .....
सारे दिन थक कर भी
अपने को तरोताजा दिखाती हैं
औरतें .....
अन्तर्मन मन की हलचल को
बेतहाशा हँस के छुपाती हैं
औरतें ......
सुनती हैं कडवे बोल अक्सर
सुना अनसुना सा दिखाती है
औरतें .....
पीसी जाती हैं वो मेंहदी की तरह
कुछ नहीं हुआ जताती हैं
औरतें ......
अपने दिल की बेचैनी /परेशानी को
किसी कोने में छुपकर आँसुओं में बहा देती हैं ..!!!!!!
औरतें ... सचमुच डिप्लोमेट होती हैं ..!!

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