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कविता: प्यार का नशा (राजीव रंजन, गया, बिहार)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
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बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
तभी तो भंवरा गुनगुनाने लगा है
प्यार का तराना सुनाने लगा है
आ गया होगा समझ में मेरी जाने जाँ
इश्क अपना रंग जमाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
 
चाँदनी रात देखो अपने शबाव पर है,
तारों की नज़र भी तेरे नकाब पर है,
हवा तेरे जुल्फों को सहलाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
 
गुफ्तगू को देख सारा आलम खामोश है,
हम भी मदहोश हैं तू भी मदहोश है,
ये फिजाएँ अब तो मन बहकाने लगा है।
बात करने में मजा आने लगा है,
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है ।

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