पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद
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फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत
है। आज
आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार राजीव रंजन की एक कविता जिसका शीर्षक है “प्यार का नशा”:
बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
तभी तो भंवरा गुनगुनाने लगा है
प्यार का तराना सुनाने लगा है
आ गया होगा समझ में मेरी जाने जाँ
इश्क अपना रंग जमाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है
प्यार का नशा समझो छाने लगा है ।
बात करने में मजा आने लगा है,
बात करने में मजा आने लगा है ।


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