पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार अमित कुमार राय की एक कविता जिसका
शीर्षक है “माँ”:
मेरे मन की आवाज यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||
जन्म - पूर्व था
साथ तुम्हारा और तदन्तर साथ मिला,
तुमने हमको बड़ा
किया है अपना लोहू पिला - पिला,
माँ का संबोधन
तुझे मिला है तू सचमुच सबसे महान,
उद्भव-कर्तृ
संतानो से तुम हर सुख की अधिकारी हो |
मेरे मन की आवाज
यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||
वर्षा, शीत और ग्रीष्मकाल में तुमने गले लगा करके,
हमें मुक्त
निद्रा दी तूने अपनी नींद गवां करके,
तुम रुदन - नाद
संतति की सुन, हर काम छोड़ अमृत देतीं,
हे माते ! केवल
तुम सदैव इस जीवन की आभारी हो |
मेरे मन की आवाज
यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||
तेरी उंगली पकड़ी
सबने फिर चलना तुम्हीं सिखाती हो,
आंगन में पग - पग
पर चलकर गिरने से हमें बचाती हो,
गिरते - गिरते
बाहें देकर, फिर उठा चुम्बनों से भरकर,
कितना ख्याल करके
माता ! सबकी जिंदगी सँवारी हो |
मेरे मन की आवाज
यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||
तूने पाला, बड़ा किया, फिर अच्छा - बुरा बताती हो,
विपदा की हर
घड़ियों में पहले याद तुम्हीं तो आती हो,
हर दोष क्षमा कर
देती हो, बस प्यार लुटाया करती हो,
इस प्यार लुटाने
के कारण हे माँ ! तुम सबसे प्यारी हो |
मेरे मन की आवाज
यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||
मेरे मन की आवाज यही - कि तुम सौभाग्य हमारी हो ||


0 Comments