पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद
पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल
फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत
है। आज
आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार शिवचरण चौहान की एक गीत जिसका
शीर्षक है “मन में राम रमे”:
मंदिर तोड़े
ग्रंथ जलाए
राम न मिट पाए।
लुटे पिटे हम
गए सताए
राम न मिट पाए।।
दीनों के हैं नाथ
और बल हीनों के
हैं बल।
राम हमारे
सुख-दुख के
साथी हैं , हैं सम्बल।
जन जन के मन
राम समाए
राम न मिट पाए।।
युगों युगों से
श्रद्धा है
आस्था हमारी है।
धीर वीर गंभीर
राम
मर्यादा प्यारी
है।
मठ मंदिर सब
गये गिराए
राम न मिट पाए।।
चाहे कोई कितना
कर ले
जोर लगा ले दम।
जन गण मन में राम
रमे हैं
प्रेम ना होगा
कम।
कितने बाबर
मीर हैं आए
राम न मिट पाए।।
मिटा दशानन
शीश गवाए।
राम न मिट पाए।।
खड़ी अयोध्या
ध्वजा उठाए
राम न मिट पाए।।


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