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कविता: रवायत (नीलम वन्दना, भोपाल, मध्य प्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार नीलम वन्दना की एक कविता  जिसका शीर्षक है “रवायत”:
 
एक रवायत है ये जिंदगी,
जिसे कायम रखना है।
मिट्टी को बस,
मिट्टी में तब्दील करना है।
ये जिम्मेदारी कब किसके कंधो पे आ जाये,
किसको है क्या खबर।
बंधन और मुक्ति का ये खेल ,
बस यही हैं ज़िन्दगी और
यही है इस ज़िन्दगी की रवायत।।
बसयूही

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