पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार नीलम वन्दना की एक कविता जिसका
शीर्षक है “रवायत”:
एक रवायत है ये
जिंदगी,
जिसे कायम रखना
है।
मिट्टी को बस,
मिट्टी में
तब्दील करना है।
ये जिम्मेदारी कब किसके कंधो पे आ जाये,
किसको है क्या
खबर।
बंधन और मुक्ति का ये खेल ,
बस यही हैं
ज़िन्दगी और
यही है इस ज़िन्दगी की रवायत।।
बसयूही
मिट्टी को बस,
ये जिम्मेदारी कब किसके कंधो पे आ जाये,
बंधन और मुक्ति का ये खेल ,
यही है इस ज़िन्दगी की रवायत।।
बसयूही


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