Welcome to the Official Web Portal of Lakshyavedh Group of Firms

कविता: नन्हा बालक (सरिता गोयल, मुरैना, मध्य प्रदेश)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के
 "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार सरिता गोयल की एक कविता  जिसका शीर्षक है “नन्हा बालक”:
               
क्रोध में आया नन्हा बालक       
मां से शस्त्रों का इजहार करे
       
बुझी हुई अग्नि ज्वलन करो   
मां, शस्त्रों का निर्माण करो
       
हाथ शीश रख आशीष दे दो    
मातृ भूमि  की लाज बचाना है
        
तू फ़िक्र ना कर मां     
सियार ने शेरो को ललकारा है
      
पग धरा मेरी पावन माटी पर    
उन बौनो को समझाना है
        
कद जिसका बालक जैसा      
अम्बर देह को धमकाता है
      
नवजात शिशु सी नयनों वाला    
हिन्द पर आधिपत्य चाहता है
 
धीरता बहुत हुईअब वीरता की बारी है      
शांतिता नहीं अब शौर्यता दिखानी है
 
बासठ ख्वाबों में आज तक डूबा है   
राणा  की खड़क  से चाऊ को जगाना है
   
जिस धूर्त मित्र की ड्रेंगन हुंकार भरे    
कायर संग कायरता की मिशाल गढ़े
    
क्रोध में आया नन्हा बालक    
मां से शास्त्रों का इजहार करे।।

Post a Comment

0 Comments