पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉ• निशा पारीक की एक कविता जिसका शीर्षक है “ओ शरद पूर्णिमा के चन्दा”:
रजनी की नीरवता में तू,
फैला स्वप्निल धवल किरण|
राका निशा का प्रियतम तू,
आता छवि ले चन्द्र किरण||
छा जाता मधुर उजाला,
बनकर प्रणयंकर तारा|
आलोक विकल निशा का,
ओ शरद पूर्णिमा के चन्दा||
षोडशी यौवन सा खिलता,
उर्वशी उर सा महका|
तू स्नेहसिक्त विरहाकुल का,
रग रग चन्दन शीतलता का|
तेरी छाँव में ह्रदय बहला,
तू अगन शीत सा दमका|
प्रिय प्राणेश्वर सा सजता,
ओ शरद पूर्णिमा के चन्दा ||
धरती ने शीत साड़ी पहनी,
ठिठुरा अंतस आकाश मही|
राधा संग रास रची जगती,
अम्बर में जीवन ज्योत सजी||
तू विश्व वेदना का सहारा,
औषधि बन श्वास समाया|
धरती की जीवन धारा,
ओ शरद पूर्णिमा के चन्दा ||
मेरी विनती भी तू सुन ले,
प्रियतम को संदेशा देदे|
तेरा रूप विरह जगाता ,
विकल रागिनी गाता||
धरती दुल्हन सी सजती,
अम्बर प्रियतम से मिलती|
मेरे प्राणाधार मिला जा ,
ओ शरद पूर्णिमा के चन्दा ||


0 Comments