पश्चिम
बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से
प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद
हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके
सामने प्रस्तुत है रचनाकार अर्चना होता की एक कविता जिसका
शीर्षक है “मैं अकेला हूं”:
"जब भी किसी फूल को देखा है मुस्कुरा हुए
याद आते हैं वो दिन,
बुने थे सपने हजार,
था ये यकीन मुझे वो करेगा इंतजार मेरा
हर मोड़ पे ,हर राह पे
पर हमें क्या पता था
वो चले जाएंगे हमें यूं तन्हा छोड़ कर,
उसकी खुशबू से महक उठा था चमन सारा
उसे भी यह भ्रम था,
पर उसका सोचना भी रह गया अधूरा
एक दिन एक अजनबी ने कहा
ले जाऊंगा इसे तोड़कर,
आज मैं अकेला हो गया ……..
आज मैं अकेला हो गया…………… ।"


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