पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंस" से प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिका" के वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार वीणा गुप्त की एक कविता जिसका शीर्षक है “ऊँचा हिमालय,सुनहरी चोटियां”:
ऊँचा हिमालय,सुनहरी चोटियां।
दिव्य आभा,विकीर्ण रश्मियां।
जीवन सुखद , पुलकित मना।
वैविध्य भरी , भाव -सम्पन्ना।
तरंगित, शीतल ,प्रफुल्ल नदियाँ,
ऊँचा हिमालय ,सुनहरी चोटियां।
प्रणत हम,तव चरण सर्वदा ।
जननी तू सुखदा
वरदा।
तुझ पर अर्पित
मेरी गतियां ।
ऊँचा हिमालय,सुनहरी चोटियां।
देख तुझे,उर-शतदल खिले,
स्नेहिल स्पर्श
त्रयताप हरे,
सर्व मंगले,कल्याणी ,सदा धन्या।
ऊँचा हिमालय,सुनहरी चोटियां।
तुझसे विलग ,जीवन व्यर्थ
गोद में तेरी,सफल सार्थक।
रज तेरी,मेरा तिलक,कितनी सुरभियां।।
ऊँचा हिमालय ,सुनहरी चोटियां।
दिव्य आभा
विकीर्ण रश्मियां।


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