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कविता: सांसों से पहले और बाद (डॉ● सुशील कुमार भोला, गंगा नगर, बन तालाब, जम्मू)

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के "लक्ष्यभेद पब्लिकेशंससे प्रकाशित होने वाली सर्वप्रथम हिन्दी डिजिटल फॉर्मेट की पत्रिका "लक्ष्यभेद हिंदी ई-पत्रिकाके वेब पोर्टल पर आपका स्वागत है। आज आपके सामने प्रस्तुत है रचनाकार डॉसुशील कुमार भोला की एक कविता  जिसका शीर्षक है “सांसों से पहले और बाद”:

तेरे प्यार में जज्बा कुछ ऐसा था,

वतन पर जैसे शहीद होने जैसा था ••

वह मिट्टी जिस पर साँसों ने जन्म लिया था,

तेरी खुशबू सांस लेने को मजबूर हुआ था ••

धरा की गोद में लम्बी नींद की साजिश,

तेरे आंचल में आंख मून्दने की ख्वाहिश ••

दिन रात के खेल में खत्म होता जीवन सफ़र,

तेरे हाथों में हाथ रह-कट जाए यह उम्र ••

तुझे कसम मेरे ख्यालों से ओझल कभी होना नहीं,

सांसों से पहले था तू बाद में भी तू भ्रम तोडना नहीं •••

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